शब-ए-बरात  दो शब्द शब और बारात से मिलकर बना है जहा शब का अर्थ है रात  और बारात का अर्थ है बरी होना मुसलमनो के लिए यह रात बहुत ही महिमा वाली होती है क्योकि दुनिआ के सभी मुसलमान इस रात अल्लाह की इबादत करते है अपने गुनाहो  की दुआ मांगते है

आज की रात मस्जिद और कब्रिस्तान सजे हुए होते है बड़ी ही रौनक होती है इस रात मुसलमान नमाज और इबादत करते है जितना भी अल्लाह को मनाया जाये उतनी कोसिस करते है जिससे अल्लाह उन्हें उनके गुनाहो से माफ़ कर दे

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *